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श्वसन तंत्र (Respiration System) किसे कहते है?, RBSE Class 10 Chapter 2

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सवातन (Breathing) :-

ये एक भौतिक प्रक्रिया है। गैसों को अंदर लेना तथा बाहर छोड़ना।

श्वसन (Respiration) :-

यह एक रासायनिक प्रक्रिया है।

C6H12O6 + O2 —–> CO2 + H2O + ATP 

यह एक जैव रासायनिक क्रिया है जिसमें ग्लूकोज के ऑक्सीकरण तथा विघटन से CO2 , H2O तथा एटीपी के निर्माण की प्रक्रिया श्वसन (Respiration) कहलाती है ।

श्वसन अंग :-

  1. त्वचा — केंचुआ, जोंक, मेंढक
  2. श्वसनिका —  कीटो
  3. गिल्स /गलफड़े/ कलोम –जलीय जीव- मछली
  4. फेफड़े — स्तनधारी

मानव में श्वसन (Respiration) की प्रक्रिया 4 चरणों में पूर्ण होती है :-

  1. बाह्य श्वसन (External Respiration)
  2. परिवहन (Transportation)
  3. आंतरिक श्वसन (Internal Respiration)
  4. कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration)

1 बाह्य श्वसन  (External Respiration) :-

वातावरण तथा फेफड़ों के मध्य गैसों का आदान प्रदान बाह्य श्वसन कहलाता है।

2  परिवहन (Transportation):-

O2 का परिवहन 97% H b के द्वारा तथा 3%  प्लाज्मा के द्वारा होता है। CO2 का 20 – 25% H b द्वारा होता है तथा 70 – 75% बाइकार्बोनेट द्वारा तथा 7% परिवहन प्लाज्मा के द्वारा होता है।

3  आंतरिक श्वसन (Internal Respiration):-

रक्त तथा अन्य ऊतकों के मध्य गैसों का आदान प्रदान आंतरिक श्वसन कहलाता है। 

4  कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration):-

कोशिका में उपस्थित गुलकोज का विघटन होता है जिससे CO2, H2O तथा एटीपी का निर्माण होता है।

मानव के श्वसन (Respiration) का पथ :- 

नासा – नासा गुहा – ग्रसनी-  श्वास नली – प्राथमिक श्वसनी- द्वितीयक श्वसनी – तृतीयक श्वसनी –  श्वसन श्वसनीका अंत: श्वसनिका – वायु कूपिका वाहिनी – वायु कूपिका

नासा / नासागुहा :-

मानव के नासा पर एक जोड़ी छिद्र पाए जाते हैं जिसे नासा छिद्र कहा जाता है।

नासा गुहा में बाल तथा सीबेसीयस ग्रंथियां पाई जाती है।बाल वायु को छानने का कार्य करते हैं ।सीबेसीयस ग्रंथियां पीले द्रव श्लेष्मा का स्राव करती हैं।

जीवाणु तथा विषाणु के संक्रमण के कारण सिबेसियस ग्रंथियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं।दोनों नासाछिद्र  हायलिन उपास्थि द्वारा पृथक रहते हैं।

नाक में तीन हड्डियां पाई जाती हैं :-

  • नेजल 
  • मेक्सिला
  • एथेमोइड

ग्रसनी :-

यह भोजन तथा वायु का उभयनिष्ठ मार्ग है।ग्रसनी पर एपिग्लोटिस ढक्कन पाया जाता है। एपिग्लोटिस भोजन को श्वास नली में जाने से रोकता है। 

हिचकी 

जब भोजन श्वास नली में चला जाए तो डायाफ्राम में लगातार संकुचन होता है जिससे एक ध्वनि का निर्माण होता है जिसे हिचकी कहते हैं। 

लेरिंक्स :-

यह ध्वनि उत्पादक यंत्र है। ध्वनि को वाणी में जीभ की सहायता से परिवर्तित किया जाता है। 

जन्म से गूंगे व्यक्तियों के वाणी केंद्र विकसित नहीं होते हैं इसलिए वह बोल नहीं पाते। 

लेरिंक्स पर 2 जोड़ी वाक् तंतु पाए जाते हैं 
  • एक जोड़ी सत्य वक तन्तु  
  • एक जोड़ी मिथ्या वाक तंतु 

मिथ्या वाक तंतु निकाल दिया जाए तो ध्वनि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

श्वासनली (Trachea):-

यह कोमल तथा लचीली होती है। लंबाई 10 – 12 सेंटीमीटर। श्वास नली के ऊपर हायलीन उपास्थि से निर्मित सी आकार के छल्ले पाए जाते हैं जो श्वास नली को पिचकने से रोकते हैं। श्वास नली आगे जाकर दो भागों में बंट जाती है जिसे प्राथमिक श्वसनी कहा जाता है। प्राथमिक  श्वसनी आगे जाकर अनेक सूक्ष्म नलिकाओं में बंट जाती है जिन्हें ब्रोंकिओल कहा जाता है। तथा ब्रोंकिओल वायु कुपिका वाहिनी की सहायता से वायु कुपिका में खुलती है तथा वायु कुपिका से गैसों का आदान-प्रदान होता है। इसलिए वायु कूपिका को श्वसन की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई कहा जाता है। मानव में 1 जोड़ी फेफड़े पाए जाते हैं। फेफड़ों के चारों तरफ 12 जोड़ी पसलियां पाई जाती हैं 1,2,3,4,5,6,7 वी जोड़ी वास्तविक पसलियां 8, 9, 10 वी जोड़ी कूट पसलियां /आभासी पसलियां 11,12 वी जोड़ी प्लावी पसलियां फेफड़ों के नीचे डायाफ्राम पाया जाता है फेफड़ों में अंतरा प्रशुक पेशियां पाई जाती हैं।अंतरा प्रशुक पेशियों में संकुचन व शिथिलन के कारण गैसों को अंदर लिया एवं बाहर छोड़ा जाता है।

श्वसन (Respiration) के प्रकार :-

1 वायवीय/ ऑक्सी श्वसन (Pneumatic / Oxy Respiration) :-

यह O2 की उपस्थिति में होता है। यह माइटोकॉन्ड्रिया की मैट्रिक्स में संपन्न होती है। इसमें 38 ATP का निर्माण होता है।जीवो द्वारा किया जाने वाला सामान्य श्वसन 

2 अनाक्सी श्वसन /अवायवीय श्वसन (Anoxic / Anaerobic Respiration) :-

यह O2 की अनुपस्थिति में होता है। यह कोशिका द्रव्य में संपन्न होता है इसमें दो ATP का निर्माण होता है।

अत्यधिक व्यायाम तथा परिश्रम के समय मांसपेशियों में अनाक्सी श्वसन (Anoxic Respiration) होता है जिससे पेशी कोशिका में लेक्टिक अम्ल का निर्माण होता है। इस लैक्टिक अम्ल के कारण मांसपेशियों में दर्द की संवेदनाएं उत्पन्न होती हैं

दूध का फटना दूध से दही बनाना –  इस प्रक्रिया में दूध में  लैक्टोबैसिलस की वृद्धि हो जाती है। 

अल्कोहोल का निर्माण – अल्कोहल का निर्माण जाईमेज एन्ज़ाइम की उपस्थिति में होता है।

पीने वाली अल्कोहल – इथेनॉल (C2H5OH)  

जहरीली शराब – मेथेनॉल (CH3OH) 

बायोगैस का निर्माण 

उपलों का निर्माण 

जैविक खाद का निर्माण 

किसमिस का निर्माण 

ब्रेड का निर्माण –

बैक्टीरिया सेकेरेमाईसिटीज सेरेबेस

Video (विडियो देखें)

श्वसन तंत्र (Respiration System)


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