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RBSE Solution for Class 9 Social Science Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन

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RBSE Solution for Class 9 Social Science Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन

In Text Questions and Answers

पृष्ठ 44 

प्रश्न 1.
हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर उत्तरी ढलानों की अपेक्षा ज्यादा सघन वनस्पति क्यों है? 
उत्तर:
हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर उत्तरी ढलानों की अपेक्षा अधिक सघन वनस्पति है क्योंकि- 

  • दक्षिणी ढलानों पर सूर्य का प्रकाश भरपूर मिलता है, जो पेड़-पौधों के बढ़ने में सहायक होता है, जबकि उत्तरी ढलानों पर सूर्य का प्रकाश अपेक्षाकृत कम पड़ता है। 
  • दक्षिणी ढलानों पर भारी मात्रा में वर्षा होती है जो प्राकृतिक वनस्पति के बढ़ने में सहायक होती है, जबकि उत्तरी ढलानों पर वर्षा न्यूनतम होती है। 

प्रश्न 2.
पश्चिमी घाट की पश्चिमी ढलानों पर पूर्वी ढलानों की अपेक्षा अधिक सघन वनस्पति क्यों है? 
उत्तर:
पश्चिमी घाट की पश्चिमी ढलाने दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा से भारी मात्रा में वर्षा प्राप्त करती हैं। भारी वर्षा घने वनों के स्थायित्व एवं विकास में सहायक होती है। इसके विपरीत, पश्चिमी घाट की पूर्वी ढलानें पवनविमख भाग में स्थित हैं, अतः वृष्टि छाया क्षेत्र में पडती हैं। कम वर्षा होने से यहाँ वनस्पति कम है। 

प्रश्न 3.
पाठ्यपुस्तक के चित्र 5.1 में दिये गये दण्ड आरेख का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए- 
(i) किस राज्य में वनों का क्षेत्रफल सबसे अधिक है? 
उत्तर:
मिजोरम राज्य में। 

(ii) किस केन्द्र-शासित प्रदेश में वनों का क्षेत्रफल सबसे कम है और ऐसा क्यों है? 
उत्तर:
केन्द्र-शासित प्रदेश ‘दमन व दीव’ में वनों का क्षेत्रफल सबसे कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहाँ की मृदा अत्यन्त लवणीय है। 

Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1. 
वैकल्पिक प्रश्न-
(i) रबड़ का सम्बन्ध किस प्रकार की वनस्पति से है? 
(क) टुंड्रा 
(ख) हिमालय 
(ग) मैंग्रोव 
(घ) उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन। 
उत्तर:
(घ) उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन। 

(ii) सिनकोना के वृक्ष कितनी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं? 
(क) 100 सेमी. 
(ख) 70 सेमी. 
(ग) 50 सेमी. 
(घ) 50 सेमी. से कम वर्षा। 
उत्तर:
(क) 100 सेमी. 

(iii) सिमलीपाल जीव-मण्डल निचय कौनसे राज्य में स्थित है? 
(क) पंजाब 
(ख) दिल्ली 
(ग) ओडिशा 
(घ) पश्चिम बंगाल। 
उत्तर:
(ग) ओडिशा 

(iv) भारत का कौनसा जीव-मण्डल निचय विश्व के जीव-मण्डल निचयों में लिया गया है? 
(क) मानस 
(ख) मन्नार की खाड़ी 
(ग) नीलगिरी 
(घ) नंदा देवी। 
उत्तर:
(क) मानस 

प्रश्न 2. 
संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न-
(i) भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण किन तत्त्वों द्वारा निर्धारित होता है? 
उत्तर:
(1) धरातल-(a) भू-भाग (b) मृदा 
(2) जलवायु-(a) तापमान (b) सूर्य का प्रकाश (c) वर्षण। 

(ii) जीव-मण्डल निचय से क्या अभिप्राय है? कोई दो उदाहरण दो। 
उत्तर:
जीव-मण्डल निचय एक बहु-उद्देश्यीय संरक्षित क्षेत्र होता है। जहाँ प्रत्येक पादप एवं जीव-प्रजाति को प्राकृतिक वातावरण में संरक्षण प्रदान किया जाता है। इसके दो उदाहरण निम्न हैं- 

  • सुन्दर वन (प. बंगाल) 
  • नंदा देवी (उत्तराखण्ड)। 

नोट 1. वैकल्पिक प्रश्न 4 के विकल्पों में दिए सभी चारों जीव मण्डल निचयों को विश्व के जीव मण्डल निचयों में लिया गया है। 

(iii) कोई दो वन्य-प्राणियों के नाम बताइए जो कि उष्ण कटिबन्धीय वर्षा और पर्वतीय वनस्पति में मिलते हैं। 
उत्तर:
1. उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन-(a) हाथी (b) बन्दर। 
2. पर्वतीय वनस्पति-(a) याक (b) हिम तेंदुआ। 

प्रश्न 3. 
निम्नलिखित में अन्तर कीजिए-
(i) वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत 
(ii) सदाबहार और पर्णपाती वन। 
उत्तर:
(i) वनस्पति जगत तथा 
प्राणी जगत में अन्तर: 

वनस्पति जगतप्राणी जगत
1. वनस्पति जगत शब्द से किसी विशेष क्षेत्र में, किसी समय में पौधों की जाति का ज्ञान होता है।1. प्राणी जगत शब्द से किसी विशेष क्षेत्र में, किसी समय में जीवों का बोध होता है। 
2. भारत में लगभग 47,000 विभिन्न जातियों के पौधे पाये जाते हैं।2. भारत में जीवों की लगभग 90,000 प्रजातियाँ मिलती हैं।

(ii) सदाबहार और पर्णपाती वन में अन्तर 

सदाबहार वनपर्णपाती वन
1. सदाबहार वन भारी वर्षा वाले प्रदेशों में पाए जाते हैं, जहाँ अल्पकालिक शुष्क मौसम के साथ, 200 से.मी. से अधिक वर्षा होती है।1. ये वन 70 से.मी. और 200 से.मी. के बीच होने वाली वर्षा वाले स्थानों पर पाए जाते हैं।
2. इन्हें वर्षा वन भी कहते हैं।2. इन्हें मानसून वन भी कहते हैं। 
3. यहाँ विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ उत्पन्न होती हैं, जैसे-वृक्ष, झाड, लताएँ आदि। क्योंकि यहाँ की जल वायु गर्म और आर्द्र होती है।3. जलवायु के आधार पर ये वन दो भागों में बँटे होते हैं-
(i) आई पर्णपाती-ये वन 100 से 200 सेमी. के बीच वर्षा वाले इलाकों में पाए जाते हैं। 
(ii) शुष्क पर्णपाती-ये वन 70 से 100 सेमी. के बीच वर्षा वाले इलाकों में मिलते हैं। 
4. इन वनों में पतझड़ का समय या मौसम निश्चित नहीं होता है। अतः वन पूरे साल हरा-भरा दिखाई पड़ता है।4. यहाँ शुष्क मौसम में लगभग 6 से 8 सप्ताह के लिए पतझड़ का दौर होता है। प्रत्येक वृक्ष प्रजाति का पतझड़ का एक निश्चित समय होता है। अतः वन उजड़ा हुआ नहीं लगता है।
5. ये वन पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों, असम और तमिलनाडु के कुछ भागों, लक्षद्वीप और अण्डमान-निकोबार द्वीप-समूहों में पाए जाते हैं।5. आर्द्र पर्णपाती वन उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालय के गिरिपदों में, झारखण्ड, पश्चिमी उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी घाट के पूर्वी ढालों पर पाए जाते हैं। शुष्क पर्णपाती वन प्रायद्वीपीय पठार, बिहार और उत्तर प्रदेश के मैदानों के छोटे-छोटे भागों में मिलते है।
6. इन वनों के मुख्य वृक्ष हैं-एबोनी, महोगनी, रोजवुड, रबड़ और सिनकोना।6. सागोन इस वन की सबसे विशिष्ट प्रजातियों में से एक है। अन्य हैं-बाँस, साल, शीशम, चंदन, खैर, अर्जुन, पीपल, नीम आदि।

प्रश्न 4. 
भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति के नाम बताएँ और अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति का ब्यौरा दीजिए। 
उत्तर:
भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति निम्न हैं-

  • उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन 
  • उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन 
  • उष्ण कटिबन्धीय कंटीले वन तथा झाड़ियाँ 
  • पर्वतीय वन 
  • मैंग्रोव वन। 

अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति-इस प्रकार की वनस्पति पर्वतीय वनों के अन्तर्गत आती है। अधिक ऊँचाई पर प्रायः शीतोष्ण कटिबन्धीय घास के मैदान पाये जाते हैं। प्रायः 3,600 मी. से कटिबन्धीय वनों तथा घास के मैदानों का स्थान अल्पाइन वनस्पति ले लेती है। 

सिल्वर-फर, जुनीपर, पाइन और बर्च इन वनों के मुख्य वृक्ष हैं । जैसे-जैसे हिम रेखा की ओर बढ़ते हैं, उत्तरोत्तर ये पेड़-पौधे बौने होते जाते हैं। अन्ततः, झाड़-झंखाड़ में बदलकर ये अल्पाइन घास के मैदानों में विलीन हो जाते हैं। अत्यधिक ऊँचाइयों पर मॉस, लिचन आदि घास मिलती हैं। 

प्रश्न 5. 
भारत में बहुत संख्या में जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं। उदाहरण सहित कारण दीजिए। 
उत्तर:
भारत में बहुत संख्या में जीव तथा पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं। भारत में लगभग 1,300 पादप प्रजातियाँ संकट में है तथा 20 प्रजातियाँ विनष्ट भी हो चुकी हैं। इसी प्रकार काफी जीव-प्रजातियाँ भी संकट में हैं और कुछ विनष्ट भी हो चुकी हैं। 

भारत में जीव और पादप प्रजातियों के संकटग्रस्त होने के निम्न कारण हैं- 
(1) प्राकृतिक आश्रय स्थलों का नष्ट होना-वन्य जीवों के नष्ट होने का सबसे बड़ा कारण उनके प्राकृतिक आश्रय स्थलों का नष्ट होना है। घरों, कृषि-भूमि, बाँधों तथा राजमार्गों के लिए वन काटने से वन्य-जीवों के आवास नष्ट हो जाते हैं। वन नष्ट होने से पादप प्रजातियाँ भी संकट में आ जाती हैं। 

(2) शिकार-शिकार वन्य-जीवों के उन्मूलन का दूसरा प्रमुख कारण है। सरिस्का में शिकारियों ने बाघों का शिकार कर वहाँ सभी बाघों को खत्म कर दिया था। अब वहाँ रणथम्भौर से बाघ लाकर छोड़े गये हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में सींगों के लिए गैंडों का शिकार किया जाता है। पशुओं तथा पक्षियों को उनके चमडे, पंखों तथा अन्य अवयवों कभी-कभी संग्रहालयों में रखने के लिए मारा जाता है। वन्य जीवों के संकट में आने से पादप प्रजातियाँ भी संकट में आती हैं। 

(3) कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग तथा प्रदूषण-कीटनाशकों का बढ़ता प्रयोग तथा वायुमण्डलीय प्रदूषण भी जीवों और पादप प्रजातियों के लिए संकट का कारण है। 

(4) रासायनिक और औद्योगिक अवशिष्ट-बढ़ते औद्योगीकरण के कारण रासायनिक तथा औद्योगिक अवशिष्ट भी बढ़ता जा रहा है। इससे भी जीव तथा पादप प्रजातियों को खतरा है। 

(5) अतिक्रमण-वनों में अतिक्रमण के कारण भी वन्य-जीवन को नुकसान हो रहा है। अभी हाल में ही रणथम्भौर में होटलों द्वारा वन क्षेत्र में स्थायी निर्माण सामने आये थे। 

प्रश्न 6. 
भारत वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी क्यों है? 
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। यहाँ लगभग 47,000 विभिन्न जातियों के पौधे पाये जाते हैं तथा लगभग 90,000 जातियों के जीव पाये जाते हैं। इस प्रकार यह वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी है। इसके मुख्य कारण निम्न हैं- 

  • भारत एक विशाल देश है। यहाँ पर्वतीय प्रदेश से लेकर पूर्वी और पश्चिमी पार्श्व में लम्बी तट रेखा तक, भारत का विस्तार बहुत अधिक है। 
  • भारत में जलवायुविक विविधता भी पाई जाती है। यहाँ रेगिस्तानी प्रदेश, हिमालय का ठण्डा प्रदेश, तटवर्ती सम-जलवायु वाला प्रदेश सब पाये जाते हैं। अतः यहाँ विभिन्न जातियों के पादप तथा जीव भी बहुलता से मिलते हैं।
  • वर्षण की दृष्टि से भारत में अल्पतम वर्षा वाले इलाके भी हैं तथा विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र भी है। 
  • यहाँ अनेक प्रकार की मृदाएँ भी पाई जाती हैं, जो विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के विकास में सहायक है।

इस प्रकार भारत की जलवायु तथा भू-लक्षणों की वैविध्यपूर्ण स्थिति के कारण भारत वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी है। 

मानचित्र कौशल 

प्रश्न 1.
भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित दिखाएँ तथा अंकित करें-
(i) उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन 
(ii) उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन। 
उत्तर: 

(iii) दो जीव-मण्डल निचय भारत के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी भागों में। 
उत्तर:
(1) उत्तरी भाग में-(i) नंदा देवी, (ii) ठंडा रेगिस्तान 
(2) दक्षिणी भाग में-(i) मन्नार की खाड़ी, (ii) अगस्त्यमलाई 
(3) पूर्वी भाग में-(i) दिहांग-दिबांग, (ii) सुंदरवन 
(4) पश्चिमी भाग में-(i) कच्छ का रन, (ii) पचमढ़ी। 

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