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RBSE Solution for Class 9 Social Science Geography Chapter 4 जलवायु

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RBSE Solution for Class 9 Social Science Geography Chapter 4 जलवायु

In Text Questions and Answers

पृष्ठ 27 

प्रश्न 1.
राजस्थान में घरों की दीवार मोटी तथा छत चपटी क्यों होती हैं? 
उत्तर:
राजस्थान एक उष्ण प्रदेश है। यहाँ अत्यधिक गर्मी पड़ती है। यहाँ घरों की दीवार मोटी इसलिए बनाई जाती है ताकि वे देरी से गर्म हों। राजस्थान में वर्षा भी कम होती है, अतः यहाँ छत चपटी बनायी जाती है। चपटी छतों का आँधियों में उड़ने का खतरा भी कम रहता है।

प्रश्न 2.
तराई क्षेत्र तथा गोवा एवं मैंगलोर में ढाल वाली छतें क्यों होती हैं? 
उत्तर:
तराई क्षेत्र तथा गोवा एवं मैंगलोर अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में स्थित हैं। गोवा और मैंगलोर में 300-400 से.मी. से अधिक वर्षा होती है तथा तराई क्षेत्रों में 150-200 सेमी. तक वर्षा होती है। इसलिए इन क्षेत्रों में ढलान वाली छतें बनाई जाती हैं ताकि पानी छतों पर रुके नहीं; बल्कि ढलवाँ छतों के सहारे सहजता से बह जाए। 

प्रश्न 3.
असम में प्रायः कुछ घर बाँस के खम्भों (Stilt) पर क्यों बने होते हैं? 
उत्तर:
असम में प्रति वर्ष 300 सेमी. से भी अधिक वर्षा होती है तथा बाढ आने पर सारा क्षेत्र पानी में डब जाता है। धरती पर लगभग पूरे वर्ष पानी भरा रहता है जिससे विषैले साँप व अन्य जानवर उनमें रहने लगते हैं। घर को पानी के भराव से तथा विषैले जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए असम में कुछ घर बाँस के खम्भों पर बने होते हैं।

प्रश्न 4.
विश्व के अधिकतर मरुस्थल उपोष्ण कटिबन्धीय भागों में स्थित महाद्वीपों के पश्चिमी किनारे पर क्यों स्थित हैं? 
उत्तर:
उपोष्ण कटिबन्धों में सर्वाधिक वर्षा व्यापारिक पवनों के द्वारा होती है, जो उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर चलती हैं। जब वे किसी महाद्वीप के पूर्वी छोर से उठती हैं, तब वे नमी से भरपूर होती हैं तथा पूर्वी किनारों पर अवरोधों के आते ही भारी मात्रा में वर्षा करती हैं। महाद्वीप के पश्चिमी छोर पर पहुँचने पर ये शुष्क हो जाती हैं। इनकी आर्द्रता समाप्त हो जाती है। परिणामस्वरूप, पश्चिमी छोर वर्षारहित रह जाता है। यही कारण है कि विश्व के अधिकतर मरुस्थल उपोष्ण कटिबन्धीय भागों में स्थित महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर स्थित हैं। 

Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1. 
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें-
(i) नीचे दिए गए स्थानों में किस स्थान पर विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है? 
(क) सिलचर 
(ख) चेरापूंजी 
(ग) मासिनराम 
(घ) गुवाहाटी। 
उत्तर:
(ग) मासिनराम

(ii) ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन को निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है? 
(क) काल वैशाखी 
(ख) व्यापारिक पवनें 
(ग) लू 
(घ) इनमें से कोई नहीं। 
उत्तर:
(ग) लू 

(iii) निम्नलिखित में से कौनसा कारण भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी है?
(क) चक्रवातीय अवदाब 
(ख) पश्चिमी विक्षोभ 
(ग) मानसून की वापसी 
(घ) दक्षिण-पश्चिम मानसून। 
उत्तर:
(ख) पश्चिमी विक्षोभ 

(iv) भारत में मानसून का आगमन निम्नलिखित में से कब होता है- 
(क) मई के प्रारम्भ में 
(ख) जून के प्रारम्भ में 
(ग) जुलाई के प्रारम्भ में 
(घ) अगस्त के प्रारम्भ में। 
उत्तर:
(ख) जून के प्रारम्भ में 

(v) निम्नलिखित में से कौनसी भारत में शीत ऋतु की विशेषता है- 
(क) गर्म दिन एवं गर्म रातें 
(ख) गर्म दिन एवं ठण्डी रातें 
(ग) ठण्डा दिन एवं ठण्डी रातें 
(घ) ठण्डा दिन एवं गर्म रातें। 
उत्तर:
(ख) गर्म दिन एवं ठण्डी रातें

प्रश्न 2. 
निम्न प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए-
(i) भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौनसे कारक हैं? 
उत्तर:
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-(1) अक्षांश (2) ऊँचाई (3) वायुदाब एवं पवन-(a) वायुदाब एवं धरातलीय पवनें, (b) ऊपरी वायु परिसंचरण तथा (c) पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ एवं उष्णकटिबन्धीय चक्रवात। 

(ii) भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु क्यों हैं? 
उत्तर:

  • मानसून का प्रभाव उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में लगभग 20° उत्तर तथा 20° दक्षिण के बीच रहता है। भारत का अधिकांश भाग इसी क्षेत्र में आता है। 
  • मानसूनी पवनों से अत्यधिक प्रभावित होने के कारण यहाँ की जलवायु मानसूनी प्रकार की है। 

(iii) भारत के किस भाग में दैनिक तापमान अधिक होता है एवं क्यों? 
उत्तर:
भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में दैनिक तापमान अधिक होता है; क्योंकि यहाँ जल की मात्रा बहुत कम है। रेतीली मिट्टी नमी व ताप को ग्रहण (सोख) नहीं कर सकती। वायुमण्डल में भी जलवाष्प की कमी होती है। लू अर्थात् धूलभरी गर्म एवं शुष्क पवनें दिन के समय इस क्षेत्र में चलती हैं। तेजी से गर्म होने के कारण दिन में तापमान बहुत बढ़ जाता है। कभी-कभी ये गर्म एवं शुष्क पवनें यहाँ देर शाम तक जारी रहती हैं। 

(iv) किन पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है? 
उत्तर:
अरब सागर से आने वाली दक्षिणी-पश्चिमी मानसनी पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है। 

(v) जेट धाराएँ क्या हैं तथा वे किस प्रकार भारत की जलवायु को प्रभावित करती हैं? 
उत्तर:
जेट धारा एक संकरी पट्टी में स्थित क्षोभमण्डल में अत्यधिक ऊँचाई (12,000 मीटर से अधिक) वाली पश्चिमी हवाएँ होती हैं। भारत में जेट धाराएँ ग्रीष्म ऋतु को छोड़कर पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती हैं। इस पश्चिमी प्रवाह के द्वारा देश के उत्तर एवं उत्तर-पश्चिमी भाग में पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभ आते हैं। 

(vi) मानसून को परिभाषित करें। मानसून में विराम से आप क्या समझते हैं? 
उत्तर:
मानसन-मानसन शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द ‘मौसिम’ से हई है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है—मौसम। मानसून का अर्थ, एक वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु के अनुसार परिवर्तन है। 

मानसून में विराम-मानसून में विराम, मानसून से सम्बन्धित एक परिघटना है। इसमें आई एवं शुष्क दोनों तरह के अन्तराल होते हैं। दूसरे शब्दों में, मानसूनी वर्षा एक समय में कुछ दिनों तक ही होती है। इसमें वर्षा रहित अन्तराल भी होते हैं। इसे ही ‘मानसून में विराम’ के नाम से जाना जाता है। 

(vii) मानसून को एक सूत्र में बाँधने वाला क्यों समझा जाता है? 
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। यहाँ उच्चावच, जलवायु, वनस्पति तथा जनजीवन में विविधता मिलती है। किन्तु मानसून एक ऐसा भौगोलिक कारक है जो देश की इन विविधताओं को एक सूत्र में बाँधकर एकता स्थापित करता है। 

मानसून के आगमन पर समस्त देश में वर्षा होती है। ये मानसूनी पवनें हमें जल प्रदान कर कृषि प्रक्रिया में तेजी लाती हैं। समस्त भारतीय भू-परिदृश्य, इसका वन्य और वनस्पति जीवन, पूरा कृषि कार्यक्रम, लोगों की जीवन शैली और उनके त्यौहार; सभी कुछ मानसून के इर्द-गिर्द घूमते हैं। सभी भारतीय प्रतिवर्ष मानसून की प्रतीक्षा करते हैं। यही कारण है कि मानसून को एक सूत्र में बाँधने वाला समझा जाता है। 

प्रश्न 3. 
उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा क्यों घटती जाती है? 
उत्तर:
उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटने के निम्न कारण हैं- 

  • आर्द्रता से युक्त बंगाल की खाड़ी की शाखा तीव्र गति से उत्तरी-पूर्वी राज्यों की ओर प्रवेश करती है और वहाँ पर स्थित पहाड़ियों से टकराकर घनघोर वर्षा करती है। इससे वहाँ अधिक वर्षा होती है। 
  • यहाँ से मानसूनी पवनें हिमालय के सहारे-सहारे पश्चिम में गंगा के मैदान की ओर बढ़ जाती हैं। आगे बढ़ने के साथ-साथ इनमें नमी की मात्रा कम होती जाती है तथा वर्षा की मात्रा भी घटती जाती है। 
  • पश्चिमी भाग समुद्र से दूर होने के कारण भी वहाँ पहुँचते-पहुँचते मानसूनी हवाएँ शुष्क हो जाती हैं तथा कम वर्षा होती है। 

प्रश्न 4. 
कारण बताएँ। 
(i) भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता है? 
उत्तर:
(अ) शीत ऋतु में हिमालय के उत्तर में उच्च दाब का केन्द्र बन जाता है, जबकि महासागर अर्थात् जलीय भाग पर निम्न दाब होता है। अतः ठण्डी शुष्क पवनें स्थल से जल (उत्तर से दक्षिण) की ओर बहती हैं। 

(ब) गर्मी के मौसम में, भूमि जल की तुलना में अधिक गर्मी ग्रहण करती है। इससे यहाँ वायु गर्म होकर कारण भ-भाग के ऊपर एक निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। इसके कारण गर्मी के दिनों में वायु की दिशा पूरी तरह से परिवर्तित हो जाती है। इस प्रकार पवनें उच्च दाब के क्षेत्र से, जो दक्षिण में हिन्द महासागर के ऊपर अवस्थित होती हैं, उत्तर में निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर बहने लगती हैं। अर्थात् पवनें जल से स्थल की ओर चलती हैं। 

(ii) भारत में अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में होती है। 
उत्तर:
भारत में अधिकांश वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से होती है जो भारत में केवल जून से सितम्बर के मध्य सक्रिय होता है। यही कारण है कि भारत में अधिकतर वर्षा इन्हीं कुछ महीनों में होती है। 

(iii) तमिलनाडु तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है। 
उत्तर:
(अ) शीत ऋतु में तमिलनाडु तट भारत में चलने वाली उत्तरी-पूर्वी शुष्क पवनों के प्रभाव के क्षेत्र में पड़ता है। जब ये पवनें बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरती हैं तो काफी मात्रा में आर्द्रता ग्रहण कर लेती हैं और तमिलनाडु के तट से टकराकर खूब वर्षा करती हैं। 

(ब) तमिलनाडु का तट दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के वृष्टिछाया प्रदेश में पड़ने के कारण ग्रीष्म ऋतु में वर्षा प्राप्त नहीं कर पाता है। 

(iv) पूर्वी तट के डेल्टा वाले क्षेत्र में प्रायः चक्रवात आते हैं। 
उत्तर:
नवम्बर की शुरुआत में उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर बना दाब का क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में स्थानान्तरित हो जाता है। यह स्थानान्तरण चक्रवाती निम्न दाब से जुड़ा होता है, जो अण्डमान सागर के ऊपर उत्पन्न होता है। यह चक्रवात जब भारत के पूर्वी तट से गुजरता है तो भारी और व्यापक वर्षा होती है। ये उष्णकटिबन्धीय चक्रवात बहुत विध्वंसक होते हैं। इस प्रकार गोदावरी, कृष्णा, कावेरी नदियों के सघन आबादी वाले डेल्टा प्रदेश प्रायः चक्रवातों द्वारा प्रभावित होते हैं। 

(v) राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है। 
उत्तर:

  • राजस्थान और गुजरात के कुछ भाग, जो पश्चिमी छोर पर स्थित हैं, सूखा प्रभावित हैं क्योंकि जब मानसूनी पवनें इन क्षेत्रों में पहुँचती हैं, उनकी आर्द्रता समाप्त हो चुकी होती है। 
  • पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र पवन-विमुख ढाल पर स्थित होने के कारण यहाँ वर्षा न्यूनतम होती है। अतः यह सूखा प्रभावित क्षेत्र है। 

प्रश्न 5. 
भारत की जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताओं को उदाहरण सहित समझाएँ। 
उत्तर:
भारत की जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताएँ निम्न प्रकार हैं- 
(1) तापमान सम्बन्धी क्षेत्रीय विविधताएँ-

  • गर्मियों में, राजस्थान के मरुस्थल में कुछ स्थानों का तापमान 50° से. तक पहुँच जाता है जबकि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में यह लगभग 20° से. रहता है। 
  • सर्दी में रात्रि में जम्मू-कश्मीर में द्रास का तापमान -45° से. तक पहुँच जाता है जबकि तिरुवनन्तपुरम में यह लगभग 22° से. हो सकता है। 
  • स्थान विशेष पर दिन और रात के तापमान में भी भारी अन्तर पाया जा सकता है। जैसे-थार के मरुस्थल में दिन का तापमान 50° से. तक हो सकता है, जबकि उसी रात को यह गिरकर 15° से. भी रह सकता है। दूसरी ओर, केरल या अण्डमान एवं निकोबार में दिन तथा रात का तापमान प्रा 
  • तटीय क्षेत्रों की अपेक्षा देश के आंतरिक भागों में तापमान में अधिक अन्तर पाया जाता है। 

(2) वर्षा सम्बन्धी क्षेत्रीय विविधताएँ-

  • हिमालय में वर्षण प्रायः हिम के रूप में होता है, जबकि शेष भारत में यह वर्षा के रूप में होता है। 
  • मेघालय में जहाँ वार्षिक वर्षा 400 से.मी. हो जाती है वहाँ लद्दाख तथा पश्चिमी राजस्थान में यह 10 सेमी. से भी कम होती है। 
  • देश के अधिकतर भागों में जून से सितम्बर तक वर्षा होती है लेकिन कुछ क्षेत्रों जैसे तमिलनाडु के तट पर अधिकतर वर्षा अक्टूबर तथा नवम्बर में होती है। 
  • उत्तरी मैदान में पूर्व की ओर अधिक वर्षा होती है जो पश्चिम की ओर घटती जाती है। 

(3) पवनों की दिशा सम्बन्धी अन्तर-ग्रीष्म ऋतु में पवनें समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं जबकि शीत ऋतु में ये स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं। 

प्रश्न 6. 
मानसून अभिक्रिया की व्याख्या करें। 
उत्तर:
मानसून की अभिक्रिया को निम्नलिखित तथ्यों की सहायता से समझा जा सकता है- 

  • स्थल तथा जल के गर्म एवं ठण्डे होने की विभेदी प्रक्रिया के कारण भारत के स्थल भाग पर निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है, जबकि इसके आसपास के समुद्रों के ऊपर उच्च दाब का क्षेत्र बनता है। 
  • ग्रीष्म ऋतु में अन्त:उष्णकटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र की स्थिति गंगा के मैदान की ओर खिसक जाती है। यह विषुवतीय गर्त होता है जो सामान्यतया विषुवत् वृत्त के लगभग 5° उत्तर में स्थित होता है। इसे मानसून के मौसम में मानसून गर्त के नाम से भी जाना जाता है। 
  • हिन्द महासागर में मेडागास्कर के पूर्व लगभग 20° दक्षिण अक्षांश के ऊपर उच्च दाब वाला क्षेत्र होता है। इस उच्च दाब की तीव्रता और स्थिति भारतीय मानसून को प्रभावित करती है। 
  • ग्रीष्म ऋतु में तिब्बत का पठार अत्यधिक गर्म हो जाता है। परिणामतः पठार पर समुद्र तल से लगभग 9 किमी. की ऊँचाई पर तीव्र ऊर्ध्वाधर वायु धाराओं और उच्च दाब का निर्माण होता है। 
  • ग्रीष्म ऋतु में हिमालय के ऊपर उत्तर-पश्चिमी जेट धाराओं का तथा भारतीय प्रायद्वीप के ऊपर उष्ण कटिबन्धीय पूर्वी जेट धाराओं का प्रभाव होता है। 
  • इसके अतिरिक्त, दक्षिणी महासागरों के ऊपर दाब की अवस्थाओं में परिवर्तन भी मानसून को प्रभावित करता है।
  • जून के आरम्भ में उत्तरी मैदानों के निम्न दाब की अवस्था तीव्र हो जाती है। यह दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यापारिक पवनों को आकर्षित करता है। ये दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवनें, दक्षिणी समुद्रों में उपोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में उत्पन्न होती हैं तथा ये पवनें गर्म महासागरों के ऊपर से होकर गुजरती हैं अतः ये नमी युक्त होती हैं एवं देश में वर्षा करती हैं। 

प्रश्न 7. 
शीत ऋतु की अवस्था एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ। 
उत्तर:
शीत ऋतु की मौसमी अवस्था एवं विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं- 
(1) अवधि-शीत ऋतु मध्य नवम्बर से आरम्भ होकर फरवरी तक रहती है। भारत के उत्तरी भाग में दिसम्बर और जनवरी सबसे ठण्डे महीने होते हैं। 
(2) तापमान-तापमान दक्षिण से उत्तर की ओर घटता जाता है। पूर्वी तट पर चेन्नई में औसत तापमान 24° से. से 25° से. के बीच होता है, जबकि उत्तरी मैदानों में यह 10° से. से 15° से. के बीच होता है। इस ऋतु में दिन गर्म और रातें ठण्डी होती हैं। उत्तर में तुषारापात सामान्य है और हिमालय के उच्च ढलानों में हिमपात होता है। 
(3) पवनें-इस मौसम में देश में उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें प्रवाहित होती हैं। ये स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं। अतः देश के अधिकतर भागों के लिए यह शुष्क मौसम होता है। 
(4) वर्षा-उत्तर-पूर्वी पवनों से तमिलनाडु तट पर कुछ वर्षा होती है, क्योंकि यहीं से ये समुद्र से स्थल की ओर बहती हैं। 
(5) वायुदाब-देश के उत्तरी भाग में एक कमजोर उच्च दाब का क्षेत्र बन जाता है, जिसमें हल्की पवनें इस क्षेत्र से बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं। 
(6) जलवायु दशाएँ-शीत ऋतु में मौसम सुखद होता है। इस ऋतु में साफ आसमान, कम तापमान, कम आर्द्रता और पवनें धीरे-धीरे चलती हैं। 
(7) चक्रवाती विक्षोभ-शीत ऋतु में उत्तरी मैदानों में पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम से चक्रवाती विक्षोभ का अन्तर्वाह विशेष लक्षण है। यह कम दाब वाली प्रणाली भूमध्यसागर एवं पश्चिमी एशिया के ऊपर उत्पन्न होती है तथा पश्चिमी पवनों के साथ भारत में प्रवेश करती है। इसके कारण शीतकाल में मैदानों में वर्षा तथा पर्वतों पर हिमपात होता 
(8) महावट-शीतकाल में होने वाली वर्षा मात्रा में कम होती है; किन्तु यह रबी की फसलों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। स्थानीय तौर पर इसे ‘मावट’ या ‘महावट’ कहते हैं। 
(9) प्रायद्वीपीय भाग अप्रभावित-प्रायद्वीपीय भागों में शीत ऋतु स्पष्ट नहीं होती है। समुद्री पवनों के प्रभाव के कारण शीत ऋतु में भी यहाँ तापमान के प्रारूप में न के बराबर परिवर्तन होता है। 

प्रश्न 8. 
भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ। 
उत्तर:
भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा एवं उसकी विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं- 
(1) अवधि-भारत में मानसूनी वर्षा का समय प्रायः जून के आरम्भ से लेकर मध्य सितम्बर तक का है। भारत में अधिकांश वर्षा (लगभग 98%) दक्षिणी-पश्चिमी ग्रीष्मकालीन मानसूनी पवनों से होती है। शीतकालीन मानसूनों से यहाँ वर्षा मात्र 5 प्रतिशत होती है। 
(2) समय की अनिश्चितता-मानसून के आगमन तथा वापसी के समय में निश्चितता का अभाव रहता है। कभी भारी वर्षा होती है और कभी सूखा ही पड़ जाता है। 
(3) वर्षण की मात्रा में अनिश्चितता-मानसूनी वर्षा में वर्षण की मात्रा भी अनिश्चित होती है। इसमें क्षेत्र तथा अवधि दोनों आधारों पर अन्तर पाया जा सकता है। 
(4) क्षेत्रानुसार मानसून की कुल अवधि में अन्तर-भारत में क्षेत्रानुसार मानसून की कुल अवधि में भी अन्तर पाया जाता है। पश्चिमी राजस्थान में मानसून की अवधि दो माह से भी कम होती है, जबकि केरल एवं अण्डमान तथा निकोबार द्वीप समूह में यह छः महीने की अवधि का होता है। 
(5) मानसून में विराम-मानसूनी वर्षा एक समय में कुछ दिनों तक ही होती है। इसमें वर्षा रहित अन्तराल भी होते हैं, जिन्हें मानसून में विराम के नाम से जाना जाता है। 
(6) बाढ़ तथा सूखा-मानसूनी वर्षा अव्यवस्थित होती है। मानसूनी वर्षा के समय किसी एक भाग में बाढ़ आ रही होती है, जबकि दूसरे भाग में सूखा पड़ रहा होता है। 
(7) असमान वितरण-मानसूनी वर्षा का वितरण असमान होता है। मानसून की अधिकतर वर्षा देश के उत्तर पूर्वी भागों में होती है। गंगा की घाटी में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है तथा राजस्थान के मरुस्थलीय भाग में बहुत कम वर्षा होती है। 
(8) मूसलाधार वर्षा-मानसूनी वर्षा मूसलाधार वर्षा होती है। एक बार आने पर यह लगातार कई दिनों तक जारी रहती है। 

मानचित्र कौशल 

प्रश्न.
भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को दर्शाएँ-
(i) 400 सेमी. से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र
(ii) 20 सेमी. से कम वर्षा वाले क्षेत्र 
(iii) भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दिशा। 
उत्तर:

प्रश्न 1. 
सारणी में दस प्रतिनिधि स्थानों के औसत माध्य मासिक तापमान तथा औसत मासिक वर्षा दिया गया है। इसका अध्ययन करके प्रत्येक स्थान के तापमान और वर्षा के आरेख बनाइए। 
उत्तर: 









प्रश्न 2. 
दस स्थानों को निम्न भिन्न क्रमों में लिखिए-
(i) विषुवत् वृत्त से उनकी दूरी के क्रम में 
(ii) समुद्र तल से उनकी ऊँचाई के क्रम में। 
उत्तर:
(i) विषुवत् वृत्त से उनकी दूरी के क्रम में-

(ii) समुद्रतल से उनकी ऊँचाई के क्रम में-
(1) कोलकाता 
(2) चेन्नई
(3) मुम्बई 
(4) थिरुवनन्तपुरम् 
(5) दिल्ली 
(6) जोधपुर 
(7) नागपुर 
(8) बेंगलुरु 
(9) शिलांग 
(10) लेह। 

प्रश्न 3. 
(i) सर्वाधिक वर्षा वाले दो स्थान-
उत्तर:

  • शिलांग,
  • मुम्बई। 

(ii) दो शुष्कतम स्थान 
उत्तर:

  • लेह,
  • जोधपुर। 

(iii) सर्वाधिक समान जलवायु वाले दो स्थान-
उत्तर:

  • मुम्बई,
  • थिरुवनन्तपुरम्। 

(iv) जलवायु में अत्यधिक अन्तर वाले दो स्थान-
उत्तर:

  • नागपुर,
  • लेह। 

(v) दक्षिण-पश्चिमी मानसून की अरब सागर शाखा के द्वारा सर्वाधिक प्रभावित दो स्थान- 
उत्तर:

  • मुम्बई,
  • नागपुर। 

(vi) दक्षिण-पश्चिमी मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा सर्वाधिक प्रभावित दो स्थान-
उत्तर:

  • शिलांग,
  • कोलकाता। 

(vii) दोनों से प्रभावित दो स्थान-
उत्तर:

  • दिल्ली,
  • जोधपुर। 

(viii) लौटती हुई तथा उत्तर-पूर्वी मानसून से प्रभावित दो स्थान-
उत्तर:

  • चेन्नई,
  • बेंगलुरु। 

(ix) पश्चिमी विक्षोभों के द्वारा शीत-ऋतु में वर्षा प्राप्त करने वाले दो स्थान- 
उत्तर:

  • दिल्ली,
  • लेह (हिमपात के रूप में)। 

(x) सम्पर्ण भारत में सर्वाधिक वर्षा वाले दो महीने 
उत्तर:

  • जुलाई,
  • अगस्त। 

(xi) निम्नलिखित महीनों में सर्वाधिक गर्म दो महीने-
(क) फरवरी 
(ख) अप्रैल 
(ग) मई 
(घ) जून। 
उत्तर:
मई एवं जून। 

प्रश्न 4. 
अब ज्ञात कीजिए-
(i) थिरुवनन्तपुरम् तथा शिलांग में जुलाई की अपेक्षा जून में अधिक वर्षा क्यों होती है? 
उत्तर:
थिरुवनन्तपुरम् भारत के दक्षिणी सिरे पर स्थित है। मानसून जून के महीने में दक्षिण की ओर से भारत में प्रवेश करता है। अत: थिरुवनन्तपुरम् में मानसून पहले आता है इसी कारण वहाँ जून में अधिक वर्षा होती है। इसी प्रकार मानसून की बंगाल की खाड़ी वाली शाखा के रास्ते में सबसे पहले शिलांग की पहाड़ियाँ आती हैं जिनसे आड़ हवाएँ टकराकर वर्षा करती हैं। अत: मानसूनी हवाओं के मार्ग में सबसे पहले पड़ने के कारण थिरुवनन्तपुरम् व शिलांग में जुलाई की अपेक्षा जून में अधिक वर्षा होती है। 

(ii) जुलाई में थिरुवनन्तपुरम् की अपेक्षा मुम्बई में अधिक वर्षा क्यों होती है? 
उत्तर:
जुलाई में मानसून थिरुवनन्तपुरम् से आगे बढ़कर देश के आन्तरिक भागों में पहुँच जाता है, जबकि मुम्बई में अरब सागर की ओर से आने वाली मानसूनी पवनें पश्चिमी घाट के कारण लगातार वर्षा करती रहती हैं। यही कारण है कि जुलाई में थिरुवनन्तपुरम् की अपेक्षा मुम्बई में अधिक वर्षा होती है। 

(iii) चेन्नई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के द्वारा कम वर्षा क्यों होती है? 
उत्तर:
दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी पवनों के लिए चेन्नई वृष्टि छाया क्षेत्र में आता है; क्योंकि यह पश्चिमी घाट ओर (पवनविमुख ढाल) पर स्थित है। इसलिए यहाँ इस मानसून द्वारा कम वर्षा होती है। 

(iv) शिलांग में कोलकाता की अपेक्षा अधिक वर्षा क्यों होती है? 
उत्तर:
मानसून की बंगाल की खाड़ी की शाखा तीव्रता में उत्तर-पूर्वी इलाकों में पहुँच जाती है। वहाँ गारो तथा खासी पहाड़ियों से टकराकर भरपूर वर्षा करती है। कोलकाता मैदानी भाग होने के कारण वहाँ हवाओं के मार्ग में बाधा नहीं आती अतः शिलांग की अपेक्षा कम वर्षा होती है। 

(v) कोलकाता में जुलाई में जून से अधिक वर्षा क्यों होती है? इसके विपरीत, शिलांग में जून में जुलाई से अधिक वर्षा क्यों होती है? 
उत्तर:
कोलकाता में जून में मानसून पूरी तरह नहीं पहुंच पाता, जबकि जुलाई में पूरी तरह पहुँचता है, अतः वहाँ जुलाई में जून से अधिक वर्षा होती है। इसके विपरीत शिलांग में जून में मानसून पूरी तरह पहुँच जाता है। जुलाई में शिलांग में इसका प्रभाव कम हो जाता है। अतः वहाँ जून में जुलाई से अधिक वर्षा होती है। 

(vi) दिल्ली में जोधपुर से अधिक वर्षा क्यों होती है? 
उत्तर:

  • मानसून के मार्ग में दिल्ली, जोधपुर की अपेक्षा पहले आता है। जोधपुर दिल्ली के पश्चिम में है। भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है। अत: दिल्ली में जोधपुर से अधिक वर्षा होती है। 
  • दिल्ली में मानसूनी पवनों के साथ-साथ पश्चिमी विक्षोभों से भी वर्षा होती है, जबकि जोधपुर में केवल मानसूनी पवनों से ही वर्षा होती है तथा वे भी यहाँ आते-आते काफी शुष्क हो जाती हैं। 

प्रश्न 5. 
अब सोचिए! ऐसा क्यों होता है-
(i) थिरुवनन्तपुरम् की जलवायु सम है। 
उत्तर:
क्योंकि यह समुद्र के किनारे स्थित है तथा भूमध्य रेखा के भी समीप है। 

(ii) देश के अधिकतर भागों में मानसूनी वर्षा के समाप्त होने के बाद ही चेन्नई में अधिक वर्षा क्यों होती है? 
उत्तर:
क्योंकि चेन्नई में लौटते हुए मानसून के कारण वर्षा होती है। इस समय यहाँ पवनें समुद्र से होकर इस पर से गुजरती हैं। 

(iii) जोधपुर की जलवायु उष्ण मरुस्थलीय है। 
उत्तर:
जोधपुर की जलवायु उष्ण मरुस्थलीय है क्योंकि-
(a) यह समुद्र से बहुत दूर है तथा यहाँ मानसूनी पवनें पहुँचते-पहुँचते शुष्क हो जाती हैं और वर्षा बहुत कम होती है। 
(b) यहाँ तापमान उच्च रहता है जो वायु की आर्द्रता को वाष्पीकृत कर वर्षा के लिए बाधक बनता है। 
(c) यहाँ बलुई मिट्टी पायी जाती है जो वर्षा के जल को तुरन्त सोख लेती है। 
(d) यहाँ वनस्पति का अभाव पाया जाता है। 

(iv) लेह में लगभग पूरे वर्ष मध्य वर्षण होता है। 
उत्तर:
क्योंकि यह अत्यधिक ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ का न्यून तापक्रम भी जल को जमा देता है। 

(v) दिल्ली और जोधपुर में अधिकतर वर्षा लगभग तीन महीनों में होती है, लेकिन थिरुवनन्तपुरम् और शिलांग में वर्ष के 9 महीनों तक वर्षा होती है।
उत्तर:
दिल्ली और जोधपुर देश के आन्तरिक भागों में स्थित हैं जहाँ मानसूनी पवनें काफी देर से पहुँचती हैं तथा सबसे पहले लौट भी जाती हैं। इसके विपरीत, थिरुवनन्तपुरम् तथा शिलांग में मानसूनी पवनें सबसे पहले वर्षा प्रदान करती हैं तथा सबसे आखिर में लौटती हैं। 

RBSE Solution for Class 9 Social Science Geography Chapter 4 जलवायु, Study Learner


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