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RBSE Solution for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

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RBSE Solution for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

हिन्दी अनुवाद

पाठ-परिचय – यह पाठ कन्याओं की हत्या पर रोक और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने की प्रेरणा हेतु निर्मित है। समाज में लड़के और लड़कियों के बीच भेद-भाव की भावना आज भी समाज में यत्र-तत्र देखी जाती है। जिसे दूर किए जाने की आवश्यकता है। संवादात्मक शैली में इस बात को सरल संस्कृत में प्रस्तुत किया गया है। 

पाठ के अनुसार राकेश अपनी गर्भवती पत्नी माला को गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग (पुत्र या पुत्री) पता करने हेतु चिकित्सक के पास भेजता है। रास्ते में राकेश की बहिन शालिनी को जब वास्तविक बात का पता चलता है तो वह अत्यन्त क्रुद्ध होकर अपनी भाभी माला को वापस घर ले आती है। घर पर वह अपने भाई राकेश को इस घोर पाप करने की मंशा पर फटकारती है एवं उसे समझाती है। अपनी बहिन की बात सुनकर राकेश को अत्यधिक पश्चात्ताप होता है। वह पुत्र एवं पुत्री को समान भाव से देखने की प्रतिज्ञा करता है। इस प्रकार प्रस्तुत पाठ में नारी के महत्त्व को दर्शाते हुए ‘भ्रूण-हत्या’ करने को महापाप बतलाया गया है। 

नाट्यांशों के कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी-अनुवाद  – 

1.”शालिनी ग्रीष्मावकाशे ……………………………..दृश्यते।” 
शालिनी …………………………….. भोजनमेव करिष्यामि। 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • भ्रातृजाया = भाभी। 
  • दृश्यते = दिखाई देती है। 
  • प्रतीयसे = प्रतीत हो रही हो। 
  • त्वदर्थम् = तुम्हारे लिए। 
  • आनयानि = लाऊँ। 
  • वाञ्छामि = चाहती हूँ।

हिन्दी अनुवाद – “शालिनी ग्रीष्मावकाश में पिता के घर आती है। सभी प्रसन्न मन से उसका स्वागत करते हैं परन्तु उसकी भाभी उदास जैसी दिखाई देती है।” 
शालिनी – भाभी! चिन्तित जैसी प्रतीत हो रही हो, सब कुशल तो है? 
माला – हाँ शालिनी! मैं कुशल हूँ। तुम्हारे लिए क्या लाऊँ, शीतल पेय (ठंडा) अथवा चाय? 
शालिनी – इस समय तो कुछ भी नहीं चाहती हूँ। रात में सभी के साथ भोजन ही करूँगी। 

2. (भोजनकालेऽपि मालायाः …………………………………………….. मुखेन किमपि नोक्तवती) 
राकेश:-भगिनी शालिनी! ………………………………………… यविधेयम् तद् सम्पादय। 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • नोक्तवती = (न + उक्तवती) नहीं बोली। 
  • भगिनी = बहिन। 
  • दिष्ट्या = भाग्य से। 
  • समागता = आई हो। 
  • सहसैव = (सहसा + एव) अचानक ही। 

हिन्दी अनुवाद – (भोजन के समय भी माला की मनोदशा स्वस्थ (ठीक) प्रतीत नहीं हो रही थी, परन्तु वह मुख से कुछ भी नहीं बोली।) 
राकेश – बहिन शालिनी! भाग्य से तम आई हो। आज मेरे कार्यालय में एक महत्त्वपर्ण गोष्ठी (मीटिंग) अचानक ही निश्चित हो गई है। आज ही चिंकित्सका के साथ मिलने का समय निर्धारित है। तुम माला के साथ चिकित्सिका (महिला डॉक्टर) के पास जाओ, उसके परामर्श (सलाह) के अनुसार जो भी करने योग्य है, उसे पूरा कीजिए। 

3. शालिनी-किमभवत? भातजायायाः ………………….. सर्व ज्ञापयिष्यति। 
(माला शालिनी च चिकित्सकां प्रति गच्छन्त्यौ वार्ता कुरुतः।) 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • भ्रातृजायायाः = भाभी का।
  • ह्यः = कल (बीता हुआ)।
  • ज्ञापयिष्यति = बतला देगी।

हिन्दी अनुवाद : 

शालिनी-क्या हुआ? क्या भाभी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है? मैं तो कल से ही देख रही हूँ कि वह स्वस्थ नहीं है, ऐसा प्रतीत हो रहा था। 
राकेश – चिन्ता का विषय नहीं है। तुम माला के साथ जाओ। रास्ते में वह सब कुछ बतला देगी। (माला और शालिनी महिला चिकित्सक की ओर जाती हुई बातचीत करती हैं।) 

4. शालिनी-किमभवत्? भ्रातृजाये! ……………………………… वातां करिष्ये। 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • स्वकुक्षौ = अपनी कोख में। 
  • उद्विग्ना = चिन्तित। 
  • शृणोति = सुनता है। 
  • वधार्हा = वध के योग्य। 
  • जघन्यं = घोर पाप। 
  • कृत्यम् = कार्य, कर्म। 
  • तूष्णीम् = चुप। 
  • अधुनैव = (अधुना + एव) इसी समय। 

हिन्दी अनुवाद – 

शालिनी-क्या हुआ? भाभी! क्या समस्या है? 
माला-शालिनी! मैं अपनी कोख में तीन महिने का गर्भ धारण किये हुए हूँ। तुम्हारे भाई का आग्रह है कि मैं लिङ्ग-परीक्षण (पुत्र अथवा पुत्री की पहचान) कराऊँ । कोख में यदि कन्या है तो गर्भपात करा दूं। मैं अत्यधिक चिन्तित हूँ, किन्तु तुम्हारा भाई बात ही नहीं सुनता है। 

शालिनी – भाई इस प्रकार से सोच भी कैसे सकता है? शिशु कन्या है तो क्या वह वध के योग्य है? यह कार्य घोर पाप है। तुमने विरोध नहीं किया? वह तुम्हारे शरीर में स्थित शिशु के वध के लिए सोच रहा है और तुम चुप बैठी हो? इसी समय घर चलो, लिंग-परीक्षण की आवश्यकता नहीं है। भाई जब घर आयेगा तब मैं बात करूँगी। 

5. (संध्याकाले भ्राता आगच्छति। ………………………………………. सर्वेऽपि एकत्रिताः) 
राकेश: – माले! त्वम् चिकित्सकां प्रति गतवती आसी:, किम् अकथयत् सा? 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • हस्तपादादिकम् = हाथ-पैर आदि को। 
  • प्रक्षाल्य = धोकर। 
  • परिवर्त्य = बदलकर। 

हिन्दी अनुवाद – [ सायंकाल (शालिनी का) भाई आता है। हाथ-पैर धोकर और वस्त्र बदलकर पूजा-घर में जाकर दीपक प्रज्वलित करता है और देवी (भवानी) की स्तुति भी करता है। उसके बाद चायपान के लिए सभी एकत्रित होते हैं।] 
राकेश-माला! तुम महिला चिकित्सक के पास गई थी, उसने क्या कहा? 

6. (माला मौनमेवाश्रयति ……………………………… दृष्ट्वा उत्तरं ददाति।) 
शालिनी – भ्रातः! त्वम् किम् ……………………….. पुत्रस्य आवश्यकताऽस्ति तर्हि। 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • तदैव = (तदा + एव) तभी। 
  • क्रोडे = गोदी में। 
  • चाकलेहम् = चाकलेट। 
  • लालयति = स्नेह। (लाड़-प्यार) करता है। 
  • अवतारयति = उतारता है। 
  • क्षिपति = डालता है। 
  • कुक्षि = कोख में। 

हिन्दी अनुवाद – (माला चुप ही रहती है। तभी खेलती हुई तीन साल की पुत्री अम्बिका पिता की गोदी में बैठ जाती है और उससे चाकलेट माँगती है। राकेश अम्बिका को स्नेह (लाड़-प्यार) करता है तथा चाकलेट देकर उसको। गोदी से उतारता है। फिर से वह माला की ओर प्रश्न-वाचक दृष्टि डालता है। शालिनी यह सब देखकर उत्तर देती है।) 

शालिंनी – हे भाई! तुम क्या जानना चाहते हो? उसकी कोख में पुत्र है अथवा पुत्री है? किसलिए? छह माह के बाद सब स्पष्ट हो जायेगा, समय से पूर्व किसलिए यह प्रयास है? 
राकेश – बहिन, तुम तो जानती ही हो कि हमारे घर में अम्बिका पुत्री के रूप में है ही। इस समय एक पुत्र की | आवश्यकता है तब………..।

7. शालिनी-तर्हि कुक्षि पुत्री अस्ति ………………………………………तव शिक्षा 
वृथा ………………………….। 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • हन्तव्या = मारने योग्य। 
  • प्रवृत्तः = तत्पर। 
  • निघृणम् = घृणा योग्य। 
  • विस्मृतवान् = भूल गये हो। 
  • विभेदम् = भेदभाव। 
  • सर्वदैव = (सर्वदा + एव) हमेशा ही। 
  • दुहिता = पुत्री। 
  • इयती = इतनी (अव्यय)। 
  • कुत्सिता = निन्दनीय, घृणा योग्य। 
  • कुण्ठिता = दुःखी। 

हिन्दी अनुवाद :  
शालिनी-तब कोख में यदि पुत्री है तो क्या (उसे) मार देना चाहिए? (तीव्र स्वर से) तुम हत्या का पाप करने के लिए तत्पर हो। 

राकेश – नहीं, हत्या तो नहीं……….! 
शालिनी – तब यह घृणा योग्य कार्य क्या है? क्या तुम सब तरह से भूल गये हो कि हमारे पिताजी ने कभी भी पुत्र और पुत्री के रूप में भेदभाव नहीं किया? वे हमेशा ही मनुस्मृति की इस पंक्ति को उदाहरण के रूप में देते थे “पुत्र पिता की आत्मा स्वरूप होता है और पुत्री पुत्र के समान होती है।” तुम भी सुबह-सायं देवी की स्तुति करते हो। किसलिए संसार को उत्पन्न करने वाली शक्ति का तिरस्कार (अपमान) कर रहे हो? तुम्हारे मन में इतनी घृणित वृत्ति (निन्दनीय व्यवहार) आ गई है, यह सोचकर ही मैं कुण्ठित (दुःखी) हूँ। तुम्हारी शिक्षा व्यर्थ………………।

8. राकेश: – भगिनि! विरम विरम …………………. अहम् कथं विस्मृतवान् 
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते ………………………………………. सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥”
अथवा 
“पितुर्दशगुणा मातेति।” त्वया सन्मार्गः प्रदर्शितः भगिनि। कनिष्ठाऽपि त्वम् मम गुरुरसि। 
श्लोकस्य अन्वयः – यत्र नार्यः पूज्यन्ते तु तत्र देवताः रमन्ते। यत्र एताः न पूज्यन्ते तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः (भवन्ति)। 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • विरम = रुको। 
  • स्वापराधम् = अपना अपराध।
  • गर्हितम् = निन्दित। 
  • रमन्ते = रमण करते हैं, प्रसन्न होते हैं। 
  • अफलाः = निष्फल।
  • कनिष्ठा = छोटी। 

हिन्दी अनुवाद : 
राकेश-बहिन! रुको, रुको (चुप रहो)। मैं अपना अपराध स्वीकार करता हूँ और लज्जित हूँ। अब से कभी भी यह निन्दित कार्य स्वप्न में भी नहीं सोचूंगा। जिस प्रकार से अम्बिका मेरे हृदय के सम्पूर्ण स्नेह की अधिकारिणी है, उसी प्रकार आने वाला शिशु भी स्नेह का अधिकारी होगा चाहे पुत्र होवे अथवा पुत्री। मैं अपने निन्दनीय विचार के प्रति पश्चाताप युक्त हूँ, मैं कैसे भूल गया – 
“जहाँ स्त्रियों का सम्मान किया जाता है वहाँ देवता प्रसन्न होते हैं। जहाँ ये (स्त्रियाँ) सम्मानित नहीं होती हैं वहाँ सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं।” 
अथवा “पिता से दस गुना माता (गौरव में) बढ़कर है।” बहिन तुमने श्रेष्ठ मार्ग दिखला दिया है। छोटी होने पर भी तुम गुरु (बड़ी) हो। 

9. शालिनी-अलम पश्चात्तापेन …………………… यथार्थरूपं करिष्यामः 
या गार्गी श्रुतचिन्तने ………………………… सर्वैः सदोत्साह्यताम्। 

कठिन-शब्दार्थ : 

  • अपगतः = दूर हो गया। 
  • सन्नद्धा = तैयार । 
  • सर्वकारस्य = सरकार की। 
  • श्रुतचिन्तने = तत्त्वों (ज्ञान) के चिन्तन-मनन में। 
  • नृपनये = राजनीति में। 
  • पाञ्चालिका = द्रौपदी। 
  • ख्याताभितः = नाम से सुप्रसिद्ध।
  • दिक्षु = दिशाओं में। 

हिन्दी अनुवाद – 
शालिनी-पश्चात्ताप मत करो। तुम्हारे मन का अन्धकार दूर हो गया, यह प्रसन्नता का विषय है। हे भाभी! आओ। सभी चिन्ता को छोड़ो और आने वाले शिशु के स्वागत के लिए तैयार हो जाओ। भाई ! तुम भी प्रतिज्ञा करो कन्या की रक्षा करने में, उसको पढ़ाने में दत्तचित्त रहोगे। “पुत्री की रक्षा करो, पुत्री को पढ़ाओ” यह सरकार की घोषणा तभी सार्थक होगी जब हम सब मिलकर इस चिन्तन को यथार्थ रूप से करेंगे तत्त्वों (ज्ञान) के चिन्तन-मनन में जो गार्गी है, राजनीति में और पराक्रम में जो द्रौपदी है, शत्रुओं को पराजित करने में जो लक्ष्मी है, आकाश के विज्ञानरूपी प्राङ्गण में जो कल्पना चावला है, खेलजगत् में अपना पराक्रम दिखाने में जो साइना नेहवाल (बैडमिन्टन खिलाड़ी) के नाम से सुप्रसिद्ध है। वही यह स्त्री सभी दिशाओं में बल से युक्त (सबला) है। सभी लोगों के द्वारा हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। 

पाठ्यपुस्तक प्रश्न और उत्तर

1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृत भाषया लिखत
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए)

(क) दिष्ट्या का समागता?
उत्तराणि:
दिष्ट्या भगिनी समागता।

(ख) राकेशस्य कार्यालये का निश्चिता?
उत्तराणि:
राकेशस्य कार्यालये गोष्ठी निश्चिता।

(ग) राकेशः शालिनी कुत्र गन्तुं कथयति?
उत्तराणि:
राकेशः शालिनी चिकित्सिकां प्रति गन्तुं कथयति।

(घ) सायंकाले भ्राता कार्यालयात् आगत्य किं करोति?
उत्तराणि:
सायंकाले भ्राता कार्यालयात् आगत्य देवीस्तुतिम् करोति।

(ङ) राकेशः कस्याः तिरस्कारं करोति?
उत्तराणि:
राकेशः कन्यायाः तिरस्कारं करोति।

(च) शालिनी भ्रातरम् कां प्रतिज्ञा कर्तुं कथयति?
उत्तराणि:
शालिनी भ्रातरम् कन्यारक्षणार्थम् प्रतिज्ञां कर्तुं कथयति।

(छ) यत्र नार्यः न पूज्यन्ते तत्र किं भवति?
उत्तराणि:
यत्र नार्यः न पूज्यन्ते तत्र क्रिया अफला भवति।

2. अधोलिखितपदानां संस्कृतरूपं (तत्सम रूपं) लिखत –
(निम्नलिखित संस्कृत शब्दों के तत्सम रूप लिखिए)

(क) कोख – …………….
(ख) साथ – …………….
(ग) गोद – …………….
(घ) भाई – …………….
(ङ) कुआँ – …………….
(च) दूध – …………….
उत्तराणि:
शब्दाः – तत्सम शब्दाः
(क) कोख – कुक्षिः
(ख) साथ – सह
(ग) गोद – क्रोडः
(घ) भाई – भ्राता
(ङ) कुआँ – कूपः
(च) दूध – दुग्धः

3. उदाहरणमनुसृत्य कोष्ठकप्रदत्तेषु पदेषु तृतीयाविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत
(उदाहरण के अनुसार कोष्ठक में दिए शब्दों की तृतीय विभक्ति रिक्त स्थान में भरिए)

(क) मात्रा सह पुत्री गच्छति (मातृ) ।
(ख) ……………. विना विद्या न लभ्यते (परिश्रम)
(ग) छात्रः ………….. लिखति (लेखनी)
(घ) सूरदासः ……….. अन्धः आसीत् (नेत्र)
(ङ) सः ………….. साकम् समयं यापयति। (मित्र)
उत्तराणि:
(क) मात्रा सह पुत्री गच्छति।
(ख) परिश्रमेण विना विद्या न लभ्यते।
(ग) छात्रः लेखन्या लिखति।।
(घ) सूरदासः नेत्राभ्यां अन्धः आसीत्।
(ङ) सः मित्रेण साकम् समयं यापयति।

4. ‘क’ स्तम्भे विशेषणपदं दत्तम् ‘ख’ स्तम्भे च विशेष्यपदम्। तयोर्मेलनम् कुरुत
(स्तंभ ‘क’ में विशेषण पद तथा ‘ख’ में विशेष्य पद दिए गए हैं। उनका उचित मिलान कीजिए)

‘क’ स्तम्भः – ‘ख’ स्तम्भः
(1) स्वस्था – (क) कृत्यम्
(2) महत्वपूर्णा – (ख) पुत्री
(3) जघन्यम् – (ग) वृत्तिः
(4) क्रीडन्ती – (घ) मनोदशा
(5) कुत्सिता – (ङ) गोष्ठी
उत्तराणि:
‘क’ स्तम्भः – ‘ख’ स्तम्भः
(1) स्वस्था – (घ) मनोदशा
(2) महत्वपूर्णा – (ङ) गोष्ठी
(3) जघन्यम् – (क) कृत्यम्
(4) क्रीडन्ती – (ख) पुत्री
(5) कुत्सिता – (ग) वृत्तिः

5. अधोलिखितानां पदानां विलोमपदं पाठात् चित्वा लिखत(निम्नलिखित पदों के विलोमशब्द पाठ से चुनकर लिखिए)

(क) श्वः
(ख) प्रसन्ना
(ग) वरिष्ठा
(घ) प्रशंसितम्
(ङ) प्रकाशः
(च) सफलाः
(छ) निरर्थकः
उत्तराणि:
(क) श्वः – ह्यः
(ख) प्रसन्ना – कुण्ठिता
(ग) वरिष्ठा – कनिष्ठा
(घ) प्रशंसितम् – गर्हितम्
(ङ) प्रकाशः – अन्धकारः
(च) सफलाः – अफलाः
(छ) निरर्थकः – सार्थकः

6. रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –
(रेखांकित पदों के लिए प्रश्न निर्माण कीजिए)

(क) प्रसन्नतायाः विषयोऽयम्।
(ख) सर्वकारस्य घोषणा अस्ति।
(ग) अहम् स्वापराधं स्वीकरोमि।
(घ) समयात् पूर्वम् आया सं करोषि।
(ङ) अम्बिका क्रोडे उपविशति।
उत्तराणि:
(क) कस्याः विषयोऽयम्?
(ख) कस्य घोषणा अस्ति?
(ग) अहम् किम् स्वीकरोमि?
(घ) कस्मात् पूर्वम् आया सं करोषि?
(ङ) अम्बिका कुत्र उपविशति?

7. अधोलिखिते सन्धिविच्छेदे रिक्त स्थानानि पूरयत
(निम्न शब्दों की संधि विच्छेद करके रिक्त स्थान पूरे कीजिए)

यथा-
नोक्तवती = न + उक्तवती
सहसैव = सहसा + ………….
परामर्शानुसारम् = ……………. + अनुसारम्
वधार्हा = …………. + अर्हा
अधुनैव = अधुना + ………………
प्रवृत्तोऽपि = प्रवृत्तः + ……………
उत्तराणि:
नोक्तवती = न + उक्तवती
सहसैव = सहसा + एव
परामर्शानुसारम् = परामर्श + अनुसारम्
वधार्हा = वध + अर्हा
अधुनैव = अधुना + एव
प्रवृत्तोऽपि = प्रवृत्तः + अपि

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा निर्देशानुसारं प्रश्नान् उत्तरत –

(क) शालिनी-भ्राता एवं चिन्तयितुमपि कथं प्रभवति? शिशुः कन्याऽस्ति चेत् वधार्हा? जघन्यं कृत्यमिदम्। त्वम् विरोधं न कृतवती? सः तव शरीरे स्थितस्य शिशोः वधार्थं चिन्तयति, त्वम् तूष्णीम् तिष्ठसि? अधुनैव गृहं चल। नास्ति आवश्यकता लिङ्गपरीक्षणस्य। भ्राता यदा गृहम् आगमिष्यति, अहम् वार्ता करिष्ये।

I. एकपदेन उत्तरत

(i) वधार्हा का अस्ति?
उत्तराणि:
कन्या

(ii) गृहं कः आगमिष्यति?
उत्तराणि:
भ्राता

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत

(i) पितृगृहं का आगच्छति?
उत्तराणि:
पितृगृहं शालिनी आगच्छति।

(ii) माला कया सह गच्छति?
उत्तराणि:
माला शालिन्या सह गच्छति।

III. यथानिर्देशम् उत्तरत

(i) ‘शिशोः इत्यत्र का विभक्तिः?
उत्तराणि:
षष्ठी

(ii) ‘भ्राता …………. कथं प्रभवति’ इत्यत्र कर्तृपदं किम्?
उत्तराणि:
भ्राता

(iii) ‘भ्राता यदा गृहम् आगमिष्यति’ इत्यत्र क्रियापदं किम्?
उत्तराणि:
आगमिष्यति

(iv) अधुनैव इत्यत्र कः सन्धिः ?
उत्तराणि:
वृद्धि

समुचितपदेन रिक्तस्थानानि पूरयत येन कथनानां भावः स्पष्टो भवेत् –

(क) जघन्यं कृत्यम् इदम्।
भावः-इदं कार्यं …….. अस्ति।
उत्तराणि:
इदं कार्यं क्रूरम् अस्ति।

(ख) कन्या चेत् वधार्हा?
(i) कन्या आदरणीया अस्ति।
(ii) यदि कन्या, हन्तव्या सा।
उत्तराणि:
(ii) यदि कन्या, हन्तव्या सा।

अधोलिखित वाक्येषु स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

प्रश्नाः
(क) चिन्तायाः विषयः नास्ति।
उत्तराणि:
कस्याः विषयः नास्ति?

(ख) भ्राता भवानीस्तुतिं करोति।
उत्तराणि:
कः भवानीस्तुतिं करोति?

(ग) अम्बिका पितुः क्रोडे उपविशति।
उत्तराणि:
अम्बिका कस्य क्रोडे उपविशति?

(घ) माला चिकित्सिकां प्रति गच्छति।
उत्तराणि:
का चिकित्सिकां प्रति गच्छति?

(ङ) कार्यालये एका गोष्ठी निश्चिता।
उत्तराणि:
कुत्र एका गोष्ठी निश्चिता?

अधोलिखिते सन्दर्भे मंजूषातः पदानि चित्वारिक्तस्थानानि पूरयत –

राकेशः-भगिनि, …………. दिष्ट्या समागता। अद्य …………….. कार्यालये एका ……………. निश्चिता।
अद्यैव ……………. चिकित्सिकया सह ……………. समयः निर्धारितः। त्वं ……………. सह चिकित्सिकां प्रति …………..।
उत्तराणि:
राकेश-भगिनि, त्वम् दिष्ट्या समागता। अद्य मम कार्यालये एका गोष्ठी निश्चिता। अद्यैव मालायाः चिकित्सिकया सह मेलनस्य समयः निर्धारितः। त्वं मालया सह चिकित्सिकां प्रति गच्छ।

अधोलिखितानां शब्दानां वाक्येषु प्रयोगं कुरुत –

अतीव, गच्छ, उपविशति।
उत्तराणि:
(क) अद्य अतीव शीतम् अस्ति।
(ख) अधुना त्वं गृहं गच्छ।
(ग) गुरुः आसन्दिकायाम् उपविशति।

अधोलिखितानां शब्दानां समक्षे दत्तैरथैः सह मेलनं कुरुत –

शब्दाः – अथैः
जघन्यम् – प्रयासः
शिशुः – अंके
क्रोडे – क्रूरम्
आयासः – बालः
तदनन्तरम् – तत्पश्चात्
उत्तराणि:
शब्दाः – अथैः
जघन्यम् – क्रूरम्
शिशुः – बालः
क्रोडे – अंके
आयासः – प्रयासः
तदनन्तरम् – तत्पश्चात्

अधोलिखितं श्लोकं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत –

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैताः न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥

I. एकपदेन उत्तरत

(क) यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, तत्र के रमन्ते?
(i) मानवाः
(ii) दैत्याः
(iii) देवताः
(iv) पशवः
उत्तराणि:
(iii) देवताः

(ख) यत्र नार्यस्तु न पूज्यन्ते, तत्र का: अफलाः भवन्ति?
(i) क्रियाः
(ii) पानम्
(iii) भोजनम्
(iv) गमनम्
उत्तराणि:
(i) क्रियाः

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत

(क) कुत्र क्रियाः अफलाः भवन्ति?
(ख) देवताः कुत्र रमन्ते?
उत्तराणि:
(क) यत्र नार्यः न पूज्यन्ते।
(ख) यत्र नार्यः पूज्यन्ते।

III. यथानिर्देशम् उत्तरत –

(क) ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ इत्यत्र क्रियापदं किम्?
(i) यत्र
(ii) नार्यः
(iii) तु
(iv) पूज्यन्ते
उत्तराणि:
(iv) पूज्यन्ते

(ख) ‘रमन्ते तत्र देवता’ इत्यत्र कर्तृपदं किम्?
(i) रमन्ते
(ii) तत्र
(iii) देवताः
(iv) मानवाः
उत्तराणि:
(iii) देवताः

(ग) ‘अफलाः’ इत्यत्र कः समासः?
(i) कर्मधारय
(ii) बहुव्रीहि
(iii) द्विगु
(iv) द्वन्द्व
उत्तराणि:
(ii) बहुव्रीहि

(घ) ‘यत्रैताः’ इत्यत्र कः सन्धिः ?
(i) वृद्धि
(ii) यण
(iii) दीर्घ
(iv) गुण
उत्तराणि:
(i) वृद्धि

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